हौसला-बढ़ाने-वाली-शायरी

shyari-masti wasti

हौसला शायरी

शायरी की दुनिया अनंत है । किसी एक विषय से ज़्यादा जीवन ही शायरी और साहित्य का विषय है । इश्क़-ओ-आश्क़ी की बात हो या हमारे जीवन का का कोई और विमर्श, शायरी इन सब से संवाद करती है । हौसला और प्रेरणा भी शायरी का एक मुख्य विषय है । असल में शायरी जीवन के हर रंग से संवाद करते हुए अपना रोल अदा करती है । अब कुछ कर जाने की क्षमता हो या किसी ख़ास अवसर पर बहादुरी के जज़्बे की बात हो शायरी अपना रोल अदा करती है ।यहाँ प्रस्तुत शायरी में आप महसूस करेंगे कि ये शायरी हमें दर्द ,दुख और जीवन की अनिश्चितताओं का सामना करने की ताक़त देती है ।

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल

हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

 

हर रोज़ गिर कर भी 
मुकम्मल खङे हैं 
एै ज़िन्दगी देख, 
मेरे हौंसले तुझसे भी बङे हैं

मेरी मंज़िल मेरे करीब है इसका मुझे एहसास है 
गुमान नहीं मुझे इरदों पे अपने 
ये मेरी सोच अौर हौंसलों का भी विश्वास है

हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते 


हर तकलिफ में ताकत की दवा देते हैं

सफलता एक दिन में नहीं मिलती, 
मगर ठान लो तो एक दिन ज़रूर मिलती है

मजबूरियाँ होती है, यक़ीन जाता है
बचपन का प्यार अक्सर तजुर्बे दे जाता है

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला

जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा

 

चाहता कौन है बेवफ़ायी करना उसने परिवार सम्भाला होगा 
यही सोच कर समझाता हूँ ख़ुदको
मजबूर होकर मुझे दिल से निकाला होगा

ऐ उदास पल जरा धीरे धीरे चल 
तू भी चला गया तो कैसे पाउँगा संभल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *